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VIDEO: बिलासपुर अस्पताल में लापरवाही की भेंट चढ़ा अजन्मा शिशु, दम घुटने से मौत

Reporter: रिशु प्रभाकर,बिलासपुर
अपडेटेड: 2 years ago IST
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बिलासपुर जिला अस्पताल की भारी लापरवाही सामने आई है। यहां पर प्रसव के लिए भर्ती करवाई गई महिला के पेट में नवजात बेटी की दम घुटने से मौत हो गई। जबकि मां की जान को निजी अस्पताल में ऑपरेशन कर परिजनों ने बचाया है। जबकि एक अन्य मामले में भी परिजनों ने भी महिला की निजी अस्पताल ले जाकर प्रसव करवाया। जिससे एक बात तो साफ है कि सरकार के जच्चा, बच्चा के सुरक्षित रखने के दावे हवा होते दिख रहे हैं।

गौरतलब है कि जिला अस्पताल बिलासपुर में 20 अप्रैल को जुखाला की हेमा देवी को प्रसव को लेकर भर्ती करवाया गया था। पहले दिन जहां डॉक्टर ने उसे व होने वाले बच्चे को स्वस्थ बताया। वहीं दूसरे दिन सुबह उपस्थित डॉक्टर व स्टाफ  नर्स ने सामान्य प्रसव  होने की बात कह कर उनके परिजनों को रूम से बाहर कर दिया। हेमा देवी के पति जितेंद्र सिंह ने बताया कि जब उनकी पत्नि की हालत गंभीर होने लगी तो उपस्थित स्टाफ  नर्स ने परिजनों को अपने मरीज से भी मिलने नहीं दिया। उन्होंने कहा कि हम स्टाफ  नर्सों के कामकाज में दखल नहीं देना चाहते थे।लेकिन भारी प्रसव की पीड़ा से कराह रही महिला के परिजनों  ने जब नर्स को डाक्टर को बुलाने की प्रार्थना की तो नर्स ने बात सुननी तो दूर  भद्दी गालियां और धक्के मार कर बाहर निकाल दिया। चंद ही मिनटों में जो स्टाफ  नर्स सामान्य प्रसव होने की बात कह रहे थे। वह कहने लगे की इस महिला का प्रसव यहां पर साधन के अभाव के चलते नहीं हो सकता। इसलिए इन्हे यहां से ले जाओ। परिजन उन्हें बिलासपुर स्थित निजी अस्पताल ले गए। जब निजी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड लिया गया तो पता चला कि 20 मिनट पहले ही बच्चा पेट में दम घुट कर मर चुका था। डॉक्टर ऐसी परिस्थिति में बच्चे को तो नहीं बचा पाए, लेकिन मां को बचा लिया। परिजनों का कहना है कि अगर हॉस्पिटल में प्रसव के साधन नहीं थे तो उन्होंने अस्पताल में भर्ती क्यों किया। उन्होंने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से हॉस्पिटल में कार्यरत डॉक्टर व स्टाफ  के खिलाफ  कार्यवाही करने की मांग की है।

गुस्साए परिजनों ने कहा कि इस घटना से जिला हॉस्पिटल के सीएमओ को भी अवगत करवाया। लेकिन अभी तक हॉस्पिटल प्रबंधन ने कार्यरत स्टाफ  नर्स के खिलाफ  कोई भी कार्रवई नहीं की गई है। वहीं एक अन्य तमीरदार मदनलाल का भी कहना है कि इसी दिन उनकी पत्नि निशा कुमारी का भी प्रसव होना था, लेकिन उन्हें भी यहां से लिजी अस्पताल का ही रूख करना पड़ा। हालांकि उनका बच्चा व पत्नी सुरक्षित है। लेकिन डॉक्टरों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में हैं।

 
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