कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में पढ़ रहे विद्यार्थियों के साथ प्रदेश सरकार कर रही सौतेला व्यवहार

Edited By: कविता मिन्हास,पालमपुर
अपडेटेड: a month ago IST

आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर इकाई द्वारा प्रेस वार्ता की गई यह वार्ता हिमाचल प्रदेश अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रांत सह मंत्री राहुल शर्मा, इकाई अध्यक्ष अंकित ठाकुर, इकाई मंत्री प्रत्यूष चंदेल द्वारा संपन्न की गई इस प्रेस वार्ता में कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर में हो रहे छात्रों एवं उनके मां-बाप के आर्थिक रूप से हो रहे शोषण के बारे में प्रदेश की सरकार एवं प्रदेश की जनता को अवगत करवाया गया। प्रांत सह मंत्री राहुल शर्मा ने कहा कृषि विश्वविद्यालय में सालाना फीस लगभग दो लाख तक पहुंच चुकी है  इसका मतलब स्नातक के लिए लगभग ₹8 लाख रुपया एक छात्र से लिया जाता है लेकिन जब हम प्रति व्यक्ति सालाना आय हिमाचल प्रदेश की देखते हैं तो वह लगभग ₹1 लाख 58 हजार ही है जिससे हिमाचल प्रदेश का एक बहुत बड़ा हिस्सा कृषि की शिक्षा से वंचित रह जाता है हालात इस कदर है कि अगर कोई व्यक्ति अपने बच्चे को कृषि के शिक्षा देना चाहेगा तो उसे भारी भरकम फीस भी भरनी पड़ेगी और किसानों के बच्चों के लिए यहां पढ़ना तथा यहां की भारी-भरकम फीस को भरना दिन प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय में हस्ताक्षर अभियान भी करवाया गया जिसमें ढाई सौ से 300 लोगों ने हस्ताक्षर किया हिमाचल प्रदेश के एक लोते कृषि विश्वविद्यालय बढ़ी हुई फीस के खिलाफ । यह ही नहीं कृषि के छात्रों के द्वारा एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के द्वारा पर्चा वितरण कर कर सभी को इसके बारे में अवगत भी करवाया गया तथा अंत में 1 दिन की सांकेतिक भूख हड़ताल भी की गई जिसमें लगभग 9 छात्र भूख हड़ताल पर बैठे थे और लगभग ढाई सौ लोग उनके समर्थन मैं बैठे थे। प्रांत सह मंत्री राहुल शर्मा ने कहा हिमाचल के इकलौते कृषि विश्वविद्यालय की फीस आज पूरे देश के कृषि विश्वविद्यालयों मैं सबसे अधिक है इसके बारे में माननीय मुख्यमंत्री जी, आदरणीय पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार जी , पूर्व राज्यपाल एवं कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर को भी इसके बारे में ज्ञापन दे दिया गया है लेकिन ज्ञापन देने के बावजूद , प्रदेश सरकार को इसके बारे में अवगत करवाने के बावजूद किसी भी प्रकार का कोई सराहनीय कदम प्रदेश सरकार के द्वारा नहीं उठाया गया है ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर मैं पढ़ रहे विद्यार्थियों के साथ प्रदेश सरकार द्वारा सौतेला व्यवहार किया जा रहा है और जब स्कॉलरशिप देने की बात आती तो कृषि के क्षेत्र में पढ़ रहे छात्रों के साथ मजाक किया जाता है और 500 और ₹700 देकर अपना पल्ला झाड़ लिया जाता है अगर हम देश के अन्य कृषि विश्वविद्यालय की बात करें तो वहां फीस 3 हजार से लेकर 20 हजार तक है प्रति सेमेस्टर और फिर इतनी महंगी फीस देने के बाद जब रोजगार की बारी आती है तो कृषि के छात्रों को रोजगार से भी वंचित किया जाता है और पुनः रोजगार की ओर प्रदेश सरकार अपना रुख मोड़ लेती है कृषि विश्वविद्यालय में भी ऐसी प्रथा चली आ रही है विश्वविद्यालय में रिटायर्ड प्राध्यापकों को फिर से रोजगार दिया जा रहा है और कृषि में पीएचडी कर रहे छात्रों के रोजगार को छीना जा रहा है विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि उनके द्वारा फीस कुछ समय से बढ़ाई नहीं गई है लेकिन जब फीस पहले ही सालाना डेढ़ से दो लाख पड़ रही हो तो इसमें और क्या बढ़ाएंगे । इन्हीं सब कारणों की वजह से आज प्रदेश का इकलौता कृषि विश्वविद्यालय का आर्थिक भोज कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्रों पर एवं उनके माता-पिता पर है कृषि विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्रों के द्वारा एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा बहुत बार प्रदेश सरकार से मेमोरेंडम के माध्यम से आग्रह किया जा चुका है हस्ताक्षर अभियान किया जा चुका है भूख हड़ताल पर बैठा जा चुका है लेकिन प्रदेश सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है ऐसा प्रतीत हो रहा है कि प्रदेश सरकार के लिए विद्यार्थियों की समस्या कोई समस्या ही नहीं है इसीलिए प्रदेश सरकार से एक बार फिर से आग्रह किया जाता है कि कृपया करके इन समस्याओं की तरफ ध्यान दें अन्यथा विद्यार्थी परिषद के एवं कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर के छात्र कक्षाओं का बहिष्कार करके सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाएंगे जिसके जिम्मेदार केवल और केवल प्रदेश सरकार एवं विश्वविद्यालय प्रशासन होगा

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