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एक मंदिर का खज़ाना जिसे सरकार हाथ तक नहीं लगा सकती

Edited By: हिमाचल एक्सप्रेस डेस्क
अपडेटेड: 2 months ago IST

दुनिया भर में कई जगह से हमें खजाने मिलते ही रहते हैं तो कहीं बड़ा कोई खजाना पाया जाता है तो उस पर मालिकाना हक का दावा सरकार द्वारा ही किया जाता है। भारत में किए गए कई अभियानों में अरबों का खजाना मिल चुका है जिस पर सरकार ने दावा किया। लेकिन आपको शायद पता नहीं होगा एक ऐसे ही खजाने के बारे में जिसकी पुष्टि भी हो चुकी है कि वह वहां पर है। फिर भी ना तो कोई वैज्ञानिक और ना ही सरकार उस पर अपना हक जता पाई है। एक ऐसा खजाना जिसे सरकार छू भी नहीं पाई है,हम बात कर रहे हैं ‘कमरूनाग मंदिर’ की झील के बारे में… जहां पर दफन खजाना आप भी अपनी आंखों से देख सकते हैं। फिर भी आप उसे छू तक नहीं सकते है।
यह मंदिर हिमाचल प्रदेश के मंडी से लगभग 68 किलोमीटर दूर रोहांडा में किसी मंदिर के पास स्थित है। कमरूनाग झील जिसमें दफन है हजारों साल से जमा खरबों का खजाना। मान्यता के अनुसार इस मंदिर से आप जो भी कामना करते हैं आपकी मनोकामना पूरी हो जाती है और बदले में आपको भी कोई आभूषण इस झील में अर्पित करना होता है। और ऐसा हजारों साल पहले से ही होता आ रहा है। इसलिए यहां पर अरबों खरबों का खजाना झील में पहुंच चुका है। 

कमरूनाग मंदिर इतिहास:

प्राचीन मान्यता के अनुसार इस मंदिर का इतिहास महाभारत से जुड़ा हुआ है। दरअसल महाभारत के सबसे महान योद्धा ‘बर्बरीक’ जब युद्ध में लड़ने के लिए आए तो भगवान श्री कृष्ण जान चुके थे कि वह सिर्फ कमज़ोर पक्ष की तरफ से ही लड़ेंगे। और अगर वह कौरवों की तरफ से लड़े तो युद्ध का नतीजा बदल सकता था। इसलिए श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उनका सर भेंट स्वरूप मांगा, इस पर बर्बरीक ने भी कहा कि वह महाभारत का पूरा युद्ध देखना चाहते हैं। और अपना सर काट कर भगवान श्री कृष्ण को दे दिया। बर्बरीक का सर सबसे ऊंची पहाड़ी पर रखा गया, और यही वह जगह है जहां पर यह मंदिर स्थित है। युद्ध के बाद इस झील का निर्माण भीम द्वारा किया गया। और तब से ही यहां पर आभूषण अर्पित किए जाते हैं। अगर आप यहां जाएंगे तो आपको की झील की गहराई में सोने चांदी के आभूषण नजर आ ही जाएंगे। आपको इसके ऊपर तैरती भारतीय रुपये भी नज़र आएंगे।

यहां पर जितने भी आभूषण चढ़ाए जाते हैं वह सब इस दिल की गहराई में चले जाते हैं। और कहा जाता है इन आभूषणों से यह झील कभी नहीं भरता। अब आप भी सोच रहे होंगे कि इन आभूषणों को आखिर क्यों नहीं निकाला जाता? तो इस से मान्यता जुड़ी है कि इस पूरे पहाड़ पर और इस झील के आस-पास नाग रूपी छोटे छोटे पौधे लगे हुए हैं, जो कि दिन ढलते ही इच्छाधारी नाग के रूप में आ जाते हैं। इसलिए इन्हें आप रात में नहीं देख पाएंगे। अगर कोई भी इस झील में इस खजाने को हाथ लगाने की कोशिश करता है, तो यही इच्छाधारी नाग इस खजाने की रक्षा करते हैं।

आज भी बड़े-बड़े खजानों पर हक जताने वाली सरकार इस खजाने को हाथ तक नहीं लगा पाई है। इससे आप इसका महत्व जान सकते हैं, और जान सकते हैं कि इस दुनिया में कई चीजें ऐसी हैं जो हमारी समझ से बाहर हैं।

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