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पंडित सुखराम ने भारतीय राजनीति को कलंकित किया

Edited By: संजीव राणा, जवाली
अपडेटेड: 5 months ago IST

पंडित सुखराम कभी हिमाचल की राजनीति में चाणक्य की भूमिका में रहे हैं परंतु उम्र के इस आखिरी पड़ाव में आकर उन्होंने राजनीति की अच्छी परंपराओं को कलुषित कर दिया है। हिमाचल की राजनीति में उन्होंने ' आया राम, गया राम ' का खेल जब से शुरू किया है तब से भारत में और विशेष करके हिमाचल के लोगों के दिलों में उनकी प्रतिष्ठा और सम्मान बुरी तरह से गिरा है ।
2014 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा के पाले में इस शर्त पर आए कि उनके बेटे अनिल शर्मा को मंडी विधानसभा क्षेत्र से टिकट मिले भाजपा हाईकमान ने उनकी यह इच्छा पूरी ही नहीं की बल्कि अनिल शर्मा को मंत्री भी बना दिया गया।
 2019 में उन्होंने अपने परिवार को बढ़ावा देने के लिए अपने पोत्र आश्रय शर्मा को मंडी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा हाईकमान के पास टिकट देने का प्रस्ताव रख दिया जोकि भाजपा ने ठुकरा दिया । इस पर दुखी होकर उन्होंने कांग्रेस हाईकमान के पास यह प्रस्ताव रखा तो उन्होंने एकदम इसे मान लिया । मंडी लोकसभा क्षेत्र के लोग पंडित सुखराम की निजी महत्वाकांक्षाओं को समझ चुके हैं और उनके पौत्र आशीष शर्मा को हराकर उन को करारा जवाब देंगे ।उनकी ' आया राम ,गया राम ' इस नीति जो कि लोकतंत्र के लिए घातक है पर पूरी रोक लगाएंगे ।पंडित सुखराम किस मुंह से पूर्व मुख्यमंत्री का साथ मांग रहे हैं जबकि उन्होंने वीरभद्र सिंह पर ही भ्रष्टाचार मैं उन्हें फंसाने का आरोप लगाया था। भाजपा हिमाचल प्रदेश लोकसभा चुनावों की चारों सीटों को बहुमत से जीतेगी और मंडी से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को भारी मतों से जीताएगी। कांगड़ा लोक सभा सीट तो पहले ही भाजपा की झोली में है । ये उद्गार संगठनात्मक जिला नूरपुर के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष केसी शर्मा ने व्यक्त किए।

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