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7 साल की मन्नतों के बाद पैदा हुआ बेटा, 7 माह बाद ही उठा पिता का साया

Edited By: हिमाचल एक्सप्रेस डेस्क
अपडेटेड: 9 months ago IST

कश्मीर घाटी के पुलवामा जिले में गुरुवार दोपहर सवा 3 बजे केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) के काफिले पर हुए आतंकी हमले में शहीद होने वाले जवानों में तरनतारन जिले के गं‌डीविंड धात्तल गांव के सुखजिंदर सिंह भी शामिल हैं। हमले के तकरीबन पौने 3 घंटे बाद, शाम 6 बजे पिता गुरमेज सिंह को उनके बेटे की शहादत की खबर दी गई। 12 जनवरी 1984 को जन्मे सुखजिंदर सिंह ने 19 साल की उम्र में, 17 फरवरी 2003 में सीआरपीएफ ज्वाइन की थी। 8 महीने पहले ही वह प्रमोट होकर हैडकांस्टेबल बने थे। गुरमेज सिंह के पूरे परिवार का खर्च सुखजिंदर सिंह की तनख्वाह से ही चलता था।

सुखजिंदर के बड़े भाई जंटा सिंह के अनुसार, 2003 में सीआरपीएफ ज्वाइन करने के 7 साल बाद, 2010 में सुखजिंदर सिंह की शादी सर्बजीत कौर के साथ हुई। विवाह के कई बरस बाद तक जब संतान नहीं हुई तो सर्बजीत कौर ने पति के साथ कई जगह मन्नतें और दुआएं मांगीं। 7 साल बाद, 2018 में सुखजिंदर सिंह को बेटे की खुशी मिली, जिसका नाम उन्होंने गुरजोत सिंह रखा। हालांकि बड़ी दुआओं और मन्नतों के बाद पैदा हुए गुरजोत सिंह के सिर से मात्र सात महीने बाद ही पिता का साया उठ गया।

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