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पालमपुर के खैरा गांव के बॉबी का वॉलीवुड में बज रहा डंका, जल्द आएगें तेलगु फ़िल्म में नजर

Edited By: सन्नी घीमान, खैरा
अपडेटेड: 10 months ago IST

पालमपुर उपमण्डल का एक छोटा सा गांव जिसकी प्रतिभाओं का डंका केवल सेना, सिविल सेवा व राजनीति, उद्यम तक ही सीमित था,अब बॉलीवुड में भी बज रहा है, जी हां बात हो रही है खैरा गांव जिसके नाम को एक और तमगा लगा कर पुख्ता किया है, खैरा गांव के बॉबी खैरा ने।पूरे भारत में जनरलों के नाम से विख्यात अब खैरा का नाम वॉलीवुड में भी पहचान बना चुका है। बड़े बैनर तले जल्द आ रही दक्षिण भारत की, तेलगु फ़िल्म फ़िल्म में नजर आएंगे बॉबी।

पालमपुर उमण्डल के खैरा के बॉबी पुत्र प्रताप सिंह का जन्म 12 अगस्त, 1985 अमृतसर में हुआ। बॉबी की आरंभिक शिक्षा डी ए पुलिस स्कूल व वी के वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला से हुई। बॉबी का फ़िल्म उद्योग में प्रवेश इच्छा से नहीं बल्कि भाग्य से हुआ। अपने व्यक्तित्व केे प्रति सजग प्राथमिकता के चलते मात्र 20 वर्ष की आयु में ही बतौर प्रोफेशनल रेस्लर अपना कैरियर की शुरूआत करने वाले बॉबी खैरा ने बाद में फैशन मॉडलिंग में अपना भाग्य आजमाया और 2005 में मिस्टर पंजाब खिताब अपने नाम किया। लैक्मी  शो, ग्लैडरैग्स 2009 जैसे कई नामी ग्रामी शो के साथ ही, रैंप पर कई प्रदशर्न करने के बाद दिल्ली की ओर रुख किया।

पर , प्रतिस्पर्धा के चलते,अपनी जगह बनाना और अच्छा काम पाना मुस्किल था। परंतु हिम्मत नहीं हारी और अपना प्रयास जारी रखा, जिसका फल मिला। उसके कुछ अरसे बाद बॉबी ने मुंबई की ओर कदम बढ़ाए। हालांकि बॉबी की पृष्ठभूमि का फिल्मजगत से दूर दूर तक का भी कोई नाता नहीं था। बकौल बॉबी का कहना है कि उनकी कामयाबी की राह में काफी मुश्किलें आई पर मेहनत व आत्मविश्वास ने मुझे जो मंजिल दी है, वो मुझे मेरी चाहत से कहीं अधिक है। और एक कलाकार  के रूप में जिस मुकाम पर पहुंचा हूं, इसमे में संतुष्ट हूँ। इसके श्रेय में, फपर पिता परमात्मा व अपने माता पिता को देता हूँ जिन्होंने मेरे हर कदम पर साथ व आशीष दिया। अब तक करीब 300 से अधिक व्यवसायिक विज्ञापन कर चुके हैं। ओला कमर्शियल,  क्लब महिंद्रा, प्राइड जुुआलुका,

बाघ बकरी चाय, डी एफ सी बैंक के ब्रांड अम्बसडोर, व कई हिंदी व पंजाबी वीडियो भी किए। बॉबी का पैतृक गांव खैरा होने के नाते ही व पैतृक गांव से अपने लगाव व प्रेम के चलते ही सर नाम बॉबी खैरा अपनाया। बॉबी अपने व्यस्त शेड्यूल के चलते भी अपने पैतृक घर खैरा आना व आकर सती माँ सन्यारी का आशीष लेना नहीं भूलते। 

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